मेहबूब के आशिक़ – गौरव दुबे

Gaurav Dubey

Gaurav Dubey

jaankari@jmcstudyhub.com

मेहबूब के आशिक़ जिस तरह जिससे हम प्यार करते हैं उससे सिर्फ हम ही प्यार नहीं करते उसके कई आशिक़ होते हैं। वैसे ही हमारे देश की स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी के चाहने वाले भी करोड़ो हैं। आज भले लता जी हमारे साथ नहीं है लेकिन वह हमेशा अपनी आवाज़ में ज़िंदा रहेंगी। उनके गये हुए नग्मे हम कभी भुला नहीं पाएंगे। क्यों न इस बार का वैलेंटाइन्स डे उनके नाम किया जाए जिन्होंने हमे गीतों के ज़रिये मोहोब्बत करना सिखाया। आज में गौरव दुबे लता जी को कवितांजलि देता हूँ। और अपनी लिखी नज़्म मेहबूब के आशिक़ उन्हें समर्पित करता हूँ। Lata ji wish you a very happy valentines day
मेहबूब आशिक़ mehboob ke aashiq

“मेहबूब के आशिक़”

तेरी मर्ज़ी है तू मिल या न मिल मुझसे
पर पता तो दे उनका जिन्हें इश्क़ हुआ था तुझसे

जिन्हें हुई थी तेरे हसीन चेहरे से मोहब्बत,
हम भी देखेंगे उन निगाहों को अपने दिल से

तुझको पाने के लिए अरमान उनके भी जागे होंगे
तुझसे हाथ मिलाते वक़्त हाथ उनके भी कांपे होंगे

तिरे घर आने के लिए तरसे होंगे उनके भी कदम
उन्होंने भी तो पुकारा होगा तुझको सनम

हमारी मेहबूब के आशिक़ों से,
हम मेहबूब के बारे में बात करेंगे

हक़ीक़त में न सही हम तुझसे,
ख़्वाबों में आके मुलाकात करेंगे

ख़ैर सोचो तुम भी ज़रा क्या तुम्हें अपने आशिक़ों से प्यार हुआ होगा
उफ्फ ये तेरी खामोशी अब इससे आगे भला और क्या हुआ होगा

वो मेहबूब का प्यार नही धोख़ा होगा
क्या सोचके गौरव ने ये लिखा होगा

तेरी मर्ज़ी है तू मिल या न मिल मुझसे
पर पता तो दे उनका जिन्हें इश्क़ हुआ था तुझसे

~ गौरव दुबे

मेहबूब के आशिक़ – लता जी के लिए Valentine’s day पर लिखी इस कविता को सुनने के लिए Youtube link पर click करें – Click Here

रेडियो से जुड़ी खूबसूरत यादों पर लिखी कविता जरूर पढ़े – Click Here

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