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Lifestyle of Jubin Nautiyal

फ़िल्मी गायक जुबिन नौटियाल का जीवन

जुबिन का ऐसा कोई गाना नही है जो शुपरहिट न होता हो, यहां जुबिन अपना गाना रिलीज़ करते हैं और वही अगले ही पल वो गाना लाखों करोड़ों दिलों की जान बन जाता है। कभी जुबिन के गानों में प्यार का लहज़ा नज़र आता है तो कभी ग़म में डूबे हुए आशिक़ की गुहार तो कभी उनके संस्कार और उनकी भक्ति नज़र आती है उनके भजनों में ।

औरत के हुक़ूक़ में – शैली मिश्रा

औरत के हुक़ूक़ में सड़क पर, नुक्क्ड़ पर, चाय की टपरी से झोंपड़े के टीले पर, कविताओं की आड़ में, बेवफ़ाई के तोहमतों से, ऑफिस की स्कैंडल तक, कपड़ों के पैमाने से वर्जिनिटी मापने तक, इश्क़ में जहां लिखेंगे हक़ीक़त की तवायफ़ को दिन के उजाले में इंक़लाबी शोर वाले रात के सन्नाटे में, कंसेंट …

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एक दूजे का साथ तुम देते रहना- अलेफिया सैफी

कविता “एक दूजे का साथ तुम देते रहना के माध्यम से में ये समझना चाहती हूं, जीवन के हर मोड़ पर सबका साथ देते रहना चाहिए। परिस्थितियों का सामना करना, हार जीत, हाँ ना के बीच के सफर को समझते रहना चाहिए।

पुष्प की अभिलाषा

पुष्प की अभिलाषा – पं. माखनलाल चतुर्वेदी

“पुष्प की अभिलाषा” नामक कविता में वह बागों में खिलने वाले पुष्पों से उनकी चाह के बारे में पूछते हैं कि उनकी कहाँ जाने की ख्वाइश है और पुष्प कहते हैं कि वह उन देश भक्तों के चरणों के नीचे आना चाहते हैं जो मातृभूमि के खातिर अपना शीष भी कुर्बान करने के लिए तैयार हैं।

तस्वीर: दिखता हुआ सच

कभी हाथों से कागज़, दीवार, पत्थर आदि के चेहरे पर बनी पेंटिंग के रूप में, तो कभी आधुनिकता की कोख़ से जन्म लिए कैमरे से कैद किये गए उन पलों के रूप में जिनको हमने नाम दिया तस्वीर। उसने अपने अलग-अलग रूपों में कभी इतिहास, कभी वर्तमान, तो कभी अपनी कल्पनाओं से भविष्य की चाही-अनचाही …

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ईद पर शायरी

ईद: खुशियों का त्यौहार

ईद की मिठास हो या दीवाली की रौनक, हर त्यौहार घर के दरवाजों पर खुशियों की दस्तक देने आता है। मुस्कुराओ की ईद हो जाए, गुनगुनाओ की ईद हो जाए, अपने छोटे बड़ों की सब गलतियां, भुल जाओ की ईद हो जाए..ईद की मिठास हो या दीवाली की रौनक, हर त्यौहार घर के दरवाजों पर खुशियों की दस्तक देने आता है।

कलम पर शायरी

कलम : ग़ुलाम भी आज़ाद भी

जिस कलम ने सर उठाके आज़ादी की हवा में सांस भी ली और ग़ुलामी की जंज़ीरों में अपने कई दिन भी गुज़ारे लेकिन उसकी चमक न तब कम थी न आज कम है।
आज शायरी कविता आदि के संग्रह हम कलम की तारीफ और आज़ादी और गुलामी की हकीकत पर लिखीं गई

अख़बार पर शायरी

अख़बार : इंक़लाब से इश्तिहार का सफर

अलग अलग समय पर शायरों ने जहाँ एक तरफ अखबार पर अपना भरोसा जताया वहीं अखबार की बदलती सूरत को देख अपना आक्रोश भी दिखाया। आज अख़बार के इसी सफर को दिखिए अलग अलग वक़्त के शेयरों की रचनाओं में –

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