
तस्वीर: दिखता हुआ सच
कभी हाथों से कागज़, दीवार, पत्थर आदि के चेहरे पर बनी पेंटिंग के रूप में, तो कभी आधुनिकता

कभी हाथों से कागज़, दीवार, पत्थर आदि के चेहरे पर बनी पेंटिंग के रूप में, तो कभी आधुनिकता

ईद की मिठास हो या दीवाली की रौनक, हर त्यौहार घर के दरवाजों पर खुशियों


अलग अलग समय पर शायरों ने जहाँ एक तरफ अखबार पर अपना भरोसा जताया वहीं
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