
फ़िल्मी गायक जुबिन नौटियाल का जीवन
जुबिन का ऐसा कोई गाना नही है जो शुपरहिट न होता हो, यहां जुबिन अपना

जुबिन का ऐसा कोई गाना नही है जो शुपरहिट न होता हो, यहां जुबिन अपना

औरत के हुक़ूक़ में सड़क पर, नुक्क्ड़ पर, चाय की टपरी से झोंपड़े के टीले

कविता “एक दूजे का साथ तुम देते रहना के माध्यम से में ये समझना चाहती

“पुष्प की अभिलाषा” नामक कविता में वह बागों में खिलने वाले पुष्पों से उनकी

कभी हाथों से कागज़, दीवार, पत्थर आदि के चेहरे पर बनी पेंटिंग के रूप में,

ईद की मिठास हो या दीवाली की रौनक, हर त्यौहार घर के दरवाजों पर खुशियों


अलग अलग समय पर शायरों ने जहाँ एक तरफ अखबार पर अपना भरोसा जताया वहीं
