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हमने दिवाली दिलवाली मनाई

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“हमने दिवाली दिलवाली मनाई”

एक दूसरे की मोहब्बत में, बुराई सबकी भुलाई,
जो सदियों से थी अधूरी, आज वो कहानी सुनाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

शब्दों के इस खेल में, विभिन्नता वाले देश में,
दक्षिण में दीपावली तो उत्तर में दिवाली मनाई

और हमने दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

पहन के नए कपड़े, थोड़ा सजे थोड़ा अकड़े,
मुँह में भर के मिठाई, बाहर फुलझड़ी जलाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

गए बिना किसी आहट, शहर की देखने जगमगाहट,
दोस्तों संग ही घूमें फिर उन्हीं से की लड़ाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

घर वालों से बचते-बचते गए, रसोई में चुपके-चुपके,
सरे डब्बे खोले और नाश्ते की प्लेट सजाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

फटाकों से किया धमाका, किसी का डर गया बुढ़ापा,
शैतानी पर हर बच्चे ने अपनी माँ से दन्त खाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

थे मेरे घर के आगे, वो कुछ गरीब बिचारे,
एक छोटी-सी कोशिश से, उनकी झोपड़ी सजाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

दिये की रौशनी में, सबकी आँखे जगमगाईं,
श्री राम के लौटने की सब ने खुशिया मनाई

तब जाके कहीं हमने, दिवाली दिलवाली मनाई
दिवाली दिलवाली मनाई

आज सब जाती-धर्म भूले, इसे देख गौरव के लफ़्ज़ बोले,
दीपों के इस पर्व की है आप सबको बधाई

हमने दिवाली दिलवाली मनाई
हमने दिवाली दिलवाली मनाई

~ गौरव दुबे

हमने दिवाली दिलवाली मनाई, इस कविता youtube पर सुनने के लिए link पर click करे – click here


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