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आतंक प्रभावित क्षेत्रों में, बेबाक़ रिपोर्टिंग से जानी जाती है अनिता प्रताप

Journalist and author Anita Pratap

अनीता प्रताप जी एक परस्कार विजेता अंतरराष्ट्रीय पत्रकार, लेखिका और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता, जिन्होंने एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में काम किया है।

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पुलित्जर पुरस्कार सम्मानित लेखिका झुम्पा जिनकी कहानियां आपके दिल को छु जाएंगी

Jhumpa Lahiri

झुम्पा लाहिरी एक लघु-कथा लेखक व पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित जिनकी कहानियां अप्रवासी अनुभव को उजागर करती है। इनकी किताबें दिल को छू लेने वाली कहानियां भावनाओं से भरी हुई होती है।

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जाने भास्कर का इतिहास :- 1958 से आरंभ हुआ दैनिक भास्कर का सफ़र

नवम्बर 2019 में वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ न्यूजपेपर्स एंड न्यूज पब्लिशर्स के रिपोर्ट के अनुसार दैनिक भास्कर को 43 लाख से ज्यादा प्रतियों के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अखबार बना ।

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2022 में पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित भारत के 4 पत्रकार

pulitzer award

2022 में भी यह पुरस्कार दिया गया, जिसमें चार भारतीय पत्रकारों का नाम शामिल है, सना इरशाद मट्टू ,अमित दवे और अदनान अबिदी, को कोरोना काल में भारत में फोटोग्राफी के लिए यह अवॉर्ड दिया गया और रायटर्स के फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी को मरणोपरांत यह अवार्ड मिला |

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कभी यूँ भी तो हो – डिम्पल सैनी

kabhi कभी यूँ भी तो हो

कभी यूँ भी तो हो की वो गुज़रा बचपन वापस आजाये, कभी यूँ भी हो की वो माँ का शीतल अंचल वापस आजाये, कभी यूँ भी हो की उस एक प्रेम पत्र का जवाब आजाये, कभी यूँ भी हो की वो बिता वक़्त वापस आजाये, कभी यूँ भी हो… कभी यूँ भी हो… ये “कभी यूँ भी हो” का ख़्याल हमारी अधूरी इक्षाओं को हमारे विचारों के माध्यम से पूरा करता है। उन इक्षाओं को जो शायद कभी पूरी हो भी सकती थीं और उन इक्षाओं को भी जो कभी पूरी नहीं होतीं। ख़ेर जो भी हो पर ये “कभी यूँ भी हो” का ख़्याल हमें एक आशा ज़रूर देता हैं। इसी आशा को अपनी एक कविता के माध्यम से दर्शाती हैं हरियाणा की रहने वाली हमारे JMC साहित्य की एक नई सदस्य डिम्पल सैनी उर्फ़ जुगनी। डिम्पल 2016 से अब तक मीडिया के कई क्षेत्रों (समाचार पत्र, न्यूज़ चैनल और रेडियो) का अनुभव ले चुकी है साथ ही आप दो महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर भी रहीं हैं। साहित्य और काव्य में इनकी ख़ास रूचि है।

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मेहबूब के आशिक़ – गौरव दुबे

मेहबूब आशिक़ mehboob ke aashiq

मेहबूब के आशिक़ जिस तरह जिससे हम प्यार करते हैं उससे सिर्फ हम ही प्यार नहीं करते उसके कई आशिक़ होते हैं। वैसे ही हमारे देश की स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी के चाहने वाले भी करोड़ो हैं। आज भले लता जी हमारे साथ नहीं है लेकिन वह हमेशा अपनी आवाज़ में ज़िंदा रहेंगी। उनके गये हुए नग्मे हम कभी भुला नहीं पाएंगे। क्यों न इस बार का वैलेंटाइन्स डे उनके नाम किया जाए जिन्होंने हमे गीतों के ज़रिये मोहोब्बत करना सिखाया। आज में गौरव दुबे लता जी को कवितांजलि देता हूँ। और अपनी लिखी नज़्म मेहबूब के आशिक़ उन्हें समर्पित करता हूँ। Lata ji wish you a very happy valentines day

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