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हिंदी पत्रकारिता के कारण ही हमारी राजभाषा एवं मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा मिला

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Post for 'Hindi Patrakarita Divas, by Gaurav Dubey

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गीतांजलि यादव, बनारस हिंदू विश्वविधालय

आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है। 30 मई 1826 में पंडित युगल किशोर शुक्ल ने प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड का प्रकाशन किया था। उदंत मार्तंड पत्र एक सप्ताहिक पत्र के रूप में प्रकाशित हुआ था।

आजादी से पूर्व

उदंत मार्तंड एक हिंदी समाचार पत्र था और इसके पहले कोई भी हिंदी समाचार पत्र प्रकाशित नहीं किया गया था। 1826 से पहले गुलामों का शहर भारत था. उस समय जहां सिर्फ अंग्रेजी व उर्दू भाषा में ही समाचार पत्र निकलता था वहां पर हिंदी भाषा एवं हिंदी समाचार पत्र का कोई अस्तित्व नहीं था। 1826 में पंडित युगल किशोर शुक्ल ने हिंदी समाचार पत्र को संपादित किया।

हिंदी पत्रकारिता से भाषा को बढ़ावा मिला

हिंदी पत्रकारिता के कारण ही हमारी राजभाषा एवं मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा मिला। आज हिंदी के कई अखबार भी प्रकाशित होते हैं । हिंदी पत्रकारिता का हमारे साहित्य में बहुत बड़ा योगदान है। साहित्य को विकास करने में निरंतर अग्रणी रहें जैसे भारतेंदु हरिश्चंद्र के पत्र ( हरिश्चंद्र मैगजीन), ( हरिश्चंद्र चंद्रिका), बालकृष्ण भट्ट के पत्र (हिंदी प्रदीप), आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ( सरस्वती) आदि। इसी प्रकार सभी पत्र हिंदी में प्रकाशित हुए और साहित्यकारों को हिंदी में बढ़ावा मिला एवं हिंदी भाषा को भी बढ़ावा मिला.

आज के संदर्भ में हिंदी पत्रकारिता

हिंदी पत्रकारिता ने काफी तरक्की कर ली है। आज हिंदी अखबारों की संख्या काफी बढ़ चुकी है और आज हिंदी चैनलों की बढ़ोतरी भी हो चुकी है। करीब 500 से ज्यादा स्थानीय और राष्ट्रीय चैनल अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साथ-ही-साथ साइबर मीडिया में भी हिंदी के ब्लॉग और वेबसाइट की भरमार है।

हिंदी पत्रकारिता का महत्व

आज के दौर में हिंदी पत्रकारिता का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। पत्रकारिता का क्षेत्र बहुत व्यापक है। आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, विज्ञान, कला एवं सभी क्षेत्रों में हिंदी पत्रकारिता का महत्व है।

निष्कर्ष

आज हिंदी पत्रकारिता का मान अत्यधिक बढ़ चुका है। गांव में लोग हिंदी पत्र का प्रयोग अधिक करते हैं। हिंदी के शब्दों को अधिक समझा एंव पढ़ा जाता है। हिंदी पत्रकारिता से हिंदी का ज्ञान विकास होता है.